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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



चलो स्कूल चलें


जयति जैन "नूतन"


     	   
मृदुभाषी मधुर चेतना
राग द्वेष कलंक भेदना
नव राही बन नव पथ पर आगे
विषमताओं में आगे बढ़ना
माणिक मोती सा बन जाने को
चलो स्कूल चलें ।
परिपक्वता अंदर लाने
अहंकार अभिमान मिटाने
मिलकर एक दुनिया बसाने
मानवता का पाठ सीखने
अर्जुन सा ध्यान पाने को
चलो स्कूल चलें ।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण समझने
भूगोलिक परिवेश समझने
ऐतिहासिक धरोहर जानने
हिंदी को आधार बनाकर
अच्छा सर्वज्ञाता बनने को
चलो स्कूल चलें ।।।

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