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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



.मछली सी हो गयी बेटियां


कवि जसवंत लाल खटीक


   
*मंदसोर की बच्ची से दुष्कर्म 
करने वाले बलात्कारी पर मौन 
नेता अभिनेता मिडिया एवं 
तमाम बुद्घिजीवीयों 
को धिक्कारती मेरी रचना*
🔥🔥🔥🔥🏹🏹🔥🔥🔥🔥🏹🏹🔥?🔥

सुन इंसान , तुझे क्या हो गया ,
इंसान से , क्यों हैवान हो गया ।
बच्चियों को सरेआम नोच रहा ,
कहाँ पर तेरा जमीर खो गया ।।

इंसान तुझे तरक्की मुबारक ,
औरतो से तू बच्चियों पर आ गया ।
बाप अब कैसे पाले बेटिया ,
वहसी दरिंदो का जमाना आ गया ।।

मछली सी , जिंदगी हो गयी बेटियो की ,
हाथ लगाओ तो डर जायेगी ।
कैसे जाए स्कूल , कैसे जाए कॉलेज ,
बाहर निकालो तो मर जाएगी ।।

हर रोज रिश्ते शर्मसार हो रहे ,
छोटी बच्चियों को खुलेआम नोच रहे ।
कोई मामा ,कोई चाचा , कोई है रिश्ते में भाई ,
हवस के पुजारी , रिश्तों पर चाकू घोंप रहे ।।

जब तक कानून नही होगा फांसी का ,
रोज एक आसिफा, निर्भया ,दिव्या मरेगी ।
मोमबत्ती जलाने से कुछ नहीं होगा , 
फांसी दो सालों को , तभी बच्चियां तरेगी ।।

जब किसी मंत्री की बेटी नोची जाएगी ,
तब जाके इनको नानी याद आएगी ।
राजनीति का भूत इनका खड़े-खड़े उतरेगा ,
तब जाके इनकी अक्कल ठिकाने आएगी ।।

मासूमों के होते रोज देख बलात्कार ,
शहर की वेश्या ने कह दी बड़ी बात  ।
बिना पैसे के आ जाओ वहसी दरिंदो  ,
पर मत नोचों इन मासूमो के जज्बात  ।।

लाखों बच्चिया रोज हो रही  शिकार ,
इनकी चीख नही सुन पा रही सरकार  ।
"जसवंत" कहे फाँसी दो सालों को ,
नाबालिग , बालिग , जो भी करे बलात्कार ।।
  

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