Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


1.
आधी रात है सन्नाटा पसरा है ड़रते हम।
2.
बादल घने बारिश धीमे धीमे शीतल हवा।
3.
घर से दूर आधियाँ आ रही है मन ड़रता।
4.
सड़क चौड़ी भीड़ खचाखच है चलना कैसे।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें