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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



मैं शर्मिन्दा न हुआ


विज्ञान व्रत


     	
वो  मेरा  चेहरा  न  हुआ 
मैं भी  शर्मिन्दा  न  हुआ 

उसका मैं हिस्सा न हुआ 
मुझको ये धोखा न  हुआ 

सब उसका सोचा न हुआ 
वो   मेरा  रस्ता   न  हुआ 

जब उसकी भाषा न हुआ 
तो   मेरा   चर्चा   न  हुआ 

होने को क्या-क्या न हुआ 
मैं ही बस अपना न  हुआ 

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