Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



उम्मीदों की शमा जलाए रखना है


बृज राज किशोर 'राहगीर'


उम्मीदों  की  शमा  जलाए रखना है।
गीतों का सिलसिला बनाए रखना है।

अच्छाई  करने  से  ही  अच्छा होगा,
बच्चों को यह पाठ  पढ़ाए रखना है।

हर घर से आए ख़ुशबू सोंधी सोंधी,
आँगन आँगन प्यार उगाए रखना है।

बेशक  चोट लगाई  होगी अपनों ने,
लेकिन घर संसार बचाए रखना है।

नाइन्साफ़ी  से  तो   लड़ना  ही  होगा,
कविताओं से अलख जगाए रखना है।

शांति हमारा मक़सद है 'बृजराज' मगर,
सरहद  पर   बन्दूक़  उठाए   रखना  है।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें