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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



पढ़नें के दिन आयें हैं


डॉ. प्रमोद सोनवानी पुष्प


     	 
नीले-नीले आसमान में ,
काले  बादल  छायें  हैं ।
बस्ता लेकर चलो साथियों ,
पढ़नें के दिन आयें हैं ।।1।।

मस्ती के दिन बीते अब तो
हर दिन स्कूल जाना है।
बाट-बाट में कीचड़-दलदल ,
 सम्हल-सम्हल कर जाना है।।

अब तो हरदम भारी-भरकम।
बस्ता  रोज  उठाना  है ,
और परीक्षा मे हम सबको
अच्छे नंबर लाना है ।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें