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वर्ष: 1, अंक17, जुलाई(द्वितीय), 2017



समाधान ...


अनिल कुमार


 		 
मंदिर हो या मस्जिद 
खुदा के घर हैं 
फिर यह अदावत क्यों चले !
चलो बैठकर करते हैं 
कुछ नेक कोशिशें 
शायद कोशिशों से 
कोई मुकाम मिले !
चलो डाल देते हैं 
उस मिटटी में 
कुछ बीज अमन के 
ताकि बेजा रंजिशों से 
अब छुटकारा मिले !
आओ मिलकर लिख दें 
एक नई इबारत 
ताकि आने वाले कल 
चहुँ ओर शांति, अमन, सौहार्द 
के फूल खिलें !
(अयोद्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर )

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