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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

दादी जानकी को भेंट किया गुस्से का साफ्टवेयर

श्रीगोपाल नारसन

विश्व शांति की दूत व प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासिका 103 वर्षीय राजयोगिनी दादी जानकी को गुस्से का साफ्टवेयर और आपरेटिंग सिस्टम नामक पुस्तक भेंट की गई।माउंट आबू में ब्रम्हाकुमारी संस्थान के मीडिया प्रभागद्वारा आयोजित राष्ट्रीय मीडिया कांफ्रेंस में बतौर स्पीकर भाग लेने गए श्रीगोपाल नारसन ने शान्ति वन में डॉ शिप्रा मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक गुस्से का सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में दादी जानकी को बताया ओर पुस्तक के लेखक डॉ शिप्रा मिश्रा व मनोज श्रीवास्तव का परिचय दादी जानकी से कराया।उनके द्वारा ब्रम्हाकुमारी चीफ दादी जानकी को यह पुस्तक भेंट की गई।उत्तराखंड सूचना विभाग के सहायक निदेशक एवं पुस्तक लेखक मनोज श्रीवास्तव ने पुस्तक की विषयवस्तु के बारे में बताया कि क्रोध हमारे कार्य क्षमता को कम करता है और सम्बन्धों को प्रभावित करता है। क्रोध के स्थान पर शान्ति से कार्य लेना बेहतर विकल्प है। इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष प्रासंगिकता रखती है। यह पुस्तक सभी आयु एवं वर्ग के लिए उपयोगी है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचार छोड़ कर सकारात्मक विचार अपनाने पर गुस्से से बचा जा सकता है। पुस्तक में क्रोध के अन्य विकल्पों को तलाशने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में क्रोध की समाजशास्त्रीय, मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्साशास्त्रीय व्याख्या, दार्शनिक आधार पर की गई है। क्रोध की समस्या से बचने के लिए हमें क्रोध के साफ्टवेयर और आपरेटिंग सिस्टम में बदलाव लाना होगा। हमारा बिलीफ सिस्टम, कम्प्यूटर के आपरेटिंग सिस्टम के समान है। इसमें डाली गई सूचनायें और साफ्टवेयर, कम्प्यूटर में डाले गये आपरेटिंग की सहायता से कार्य करेगी। इस अवसर पर दादी जानकी के साथ हंसा दीदी व शीलू दीदी भी मौजूद रही।


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