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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

योग के बदलते अर्थ
*क्लाइमेट एक्शन होगी अंतराष्ट्रीय योग दिवस की थीम*
संदर्भ:- 21 जून (योग दिवस)

राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"

हम प्रतिवर्ष 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाते हैं। इस वर्ष पूरी दुनियां पांचवा अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए तैयार है। योग प्राणायाम आसनों के नियमित अभ्यास से शरीर निरोग रहता है। व्यक्ति एलोपैथिक आयुर्वेदिक होम्योपैथिक दवाइयों के ख़र्चे से बच जाता है। शरीर स्वस्थ रहता है। मस्तिष्क तरोताजा रहता है। मजबूत तन मजबूत मन बनता है। ईश्वर में ध्यान लगता है। आत्मा से परमात्मा के मिलन का नाम योग है। चित्त की वृतियों का भली प्रकार शांत हो जाना योग है। तन को मन से जीवन को स्वास्थ्य से जोड़ने की क्रिया का नाम योग है।

योग के लिए इस अंतराष्ट्रीय दिवस को दिसम्बर 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भाषण के दौरान 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व मे मनाया जाएगा।

2019 के योग दिवस का थीम क्लाइमेट एक्शन रखा गया है। योग का अभ्यास करने से जलवायु परिवर्तन का समाधान हो सकता है। योगासनों से शरीर व मन के मध्य एक आंतरिक सन्तुलन कायम होता है। यह अपने व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। पृथ्वी को मनुष्य द्वारा जो नुकसान पहुंचाया जा रहा है जिसके कारण जलवायु परिस्थितियों में भारी बदलाव हो रहा है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने योगाभ्यास के जरिये जलवायु क्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए फैसला किया है। जो हमारे शरीर की आत्मा को प्रकृति से जोड़ता है और पृथ्वी कर बदलते जलवायु या क्लाइमेट के प्रति एक्शन लेने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने योग के बारे में कहा है कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है।

यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है। विचार और एक्शन संयम और पूर्णता मनुष्य व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्वास्थ्य व कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है योग। अपनी जीवन शैली को बदलकर और चेतना पैदा करके यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है।

वर्तमान में योग का अर्थ बदलता जा रहा है। योग का वास्तविक अर्थ है इस आत्मा का परमात्मा से मिलन कैसे हो। क्या करें जिससे इंद्रियों पर संयम कर सकें। इंद्रियों का संयम मन का शमन श्वांस प्रश्वांस का यजन ही योग की प्रक्रिया है। मात्र योगी को श्वांस पर दृष्टि रखना है। योग शारीरिक मानसिक या आध्यात्मिक अभ्यास है जो भारत की देन है जो जीवन के पूर्ण तरीके को वर्णित करता है। योग समझ को विकसित करते हुए स्वयं को जानने की विधि है। यह मात्र एक्सरसाइज करना ही नहीं है। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जिसका अर्थ है एकजुट होना। शरीर से जुड़ना। 21 जून को वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। योग दिवस का लोगो भी हमे शांति व सद्भाव में रहना सीखाता है जो योग की प्रकृति है।

ऋषि मुनि की संस्कृति व प्राचीन योग परम्परा को अपनाने से या नियमित योग करने से फायदे ही फायदे हैं। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार से दिन का श्रीगणेश करना चाहिए। कुछ सांस लेने के व्यायाम करना चाहिए और प्रतिदिन कुछ मिनिट के लिए योग करना चाहिए। नित्य योग से ध्यान क्षमता का विकास होता है याददाश्त व प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है मांसपेशियों का दर्द दूर होता है। सम्पूर्ण स्वस्थ्य हो जाता है। रीढ़ को स्थिर करता है। पीठ दर्द व अवसाद तनाव दूर होता है मन शरीर व आत्मा को शान्ति व आनंद प्रदान करता है।

शीर्षासन से पाचन तन्त्र ठीक रहता है। सूर्य नमस्कार से शरीर निरोग व स्वस्थ होता है। कटि चक्रासन से कमर की चर्बी कम होती है।पादहस्तासन खड़े होकर किया जाता है। इससे पैर व हाथ मजबूत होते हसन। ताड़ासन से लंबाई बढ़ती है व पैरों में मजबूती आती है। विपरीत नोकसान से मोटापा कम होती है। हलासन से शरीर लचीला बनता है। सर्वांगासन से दुर्बलता दूर होती है। शवासन से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है। मयूरासन से फेफड़े व पसलियां को शक्ति मिलती है। पाश्चिमोतनासन से उदर व छाती की कसरत होती है। वक्रासन से मेरुदंड सीधा होता है। मत्स्य आसन से गला साफ रहता है। पद्मासन से रक्त संचार तेजी से होता है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारत्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।।

संसार के संयोग वियोग से रहित अव्यक्त ब्रह्म के मिलन का नाम योग है। शारीरिक योग तो योग की प्रारंभिक अवस्था है।। योगी के लक्षण गीता में लिखे हैं। योगी आत्मशुद्धि के लिए कर्म करते हैं। इन्द्रिय मन बुद्धि व शरीर द्वारा भी आसक्ति त्याग कर रहते हैं। उनके भीतर असीम शांति होती है।योग के परिणाम को प्राप्त पुरुष आत्मा के मूल परमात्मा में स्थित होते हैं।

अनुलोम विलोम भ्रामरी भस्त्रिका प्राणायाम आदि नियमित करने से लाभ ही लाभ होते हैं। योग के आठ अंग है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार, धारणा, ध्यान ,समाधि। महर्षि पतंजलि ने योग की सीधी परिभाषा दी। चित्त की वृतियों का निरोध करना ही योग है। चित्त बड़ा चंचल। हवा से बातें करता है। इसे रोकना अभ्यास से संभव है। मन को रोकने के लिए मस्तिष्क को शांत रखना होगा। पतंजलि के योग सूत्रों में पूर्ण कल्याण शारिरिक मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों वाले योग की विस्तार से जो व्याख्या की वही अष्टांग योग हमे योग करने की क्रमिक अवस्था के भेद बताता है।

आज घर घर योग किया जा रहा है। प्रातः जल्दी उठकर योगाभ्यास सीख रहे हैं। वे अष्टांग योग का मतलब भी समझते हैं। हमारे देश के यही योगी विश्व को योग सीखा कर योग परम्परा आगे बढ़ाएंगे। करो योग और रहो निरोग। आज घर घर ये संदेश पहुंचाने की जरूरत है। योग की पांच हजार साल पुरानी परंपरा को योग दिवस के रूप में मनाने के लिए विश्व के 177 देशों में तैयारियां हो रही है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के प्राचीन योगाभ्यास को नयी पीढ़ी के युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाना है। योग के फायदे के बारे में जागरूक करना। विभिन्न जाति धर्म भाषा सम्बन्धी भेदभाव को दूर करना भी इसका उद्देश्य है। सभी मनुष्यों को एक मंच पर लाकर विश्व शांति करना इसका उद्देश्य है। शरीर को रोगमुक्त करने का योग एक प्राकृतिक तरीका है। यह अंतर के विकार दूर करता है। मानसिक शांति देता है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह योग से ही होता है। इसलिए इसे नियमित करना चाहिए। योगाभ्यास से ब्लड शुगर इम्यून सिस्टम बेहतर रहता है। आत्मकेंद्रित रहने की क्षमता बढ़ती है। स्ट्रेस डिप्रेशन माइग्रेन चिन्ता तनाव दूर होता है। पेट सम्बन्धी बीमारियां दूर हो जाती है। बुखार एलर्जी खत्म हो जाती हैम एसिडिटी अस्थमा दृष्टि कमजोर होना बालों का टूटना सब से मुक्ति मिल जाती है।


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