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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

मासूम

सुनील मिश्रा ' शोधार्थी'

वे मासूम बच्चे जिंदगी से निराश सिर- झुकायेंगे फुटपाथ के किनारे। हर चेहरे को बड़ी आशा से ताक कर अनायास ही हाथ पासरे हुते जैसे किसी देव से तीनों लोक मांगने जा रहें हो लेकिन कुछ नहीं मिलता सिर्फ बेजान रुखे शब्दों के शिवा बस यूं ही आत्मा सिसकारियां और आंखें रुआंसी थी। सब एकटक चुपचाप सजल नेत्रों के साथ देखते रहते है....


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