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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

'मतलब' का मतलब

शुचि 'भवि'

मतलब की इस दुनिया में बिन मतलब के कुछ भी नहीं दोस्ती भी मतलब की रिश्ते भी सब मतलब के हँसना भी तो मतलब से रोना भी है मतलब से मतलब से ही हाथ मिलाना मतलब से ही देना दान मतलब की है हर पहचान मतलब से पूजे भगवान मतलब से आती मुस्कान मतलब बिन, अपने अंजान मतलब से ही प्रेम करें मतलब से ही धीर धरें मतलब से ही बोलें सच मतलब से ही झूठ में रब मतलब से सब नियम बनें मतलब से ही टूटें भी मतलब से मिलता सबकुछ मतलब से बस मौत न मिलती मतलब से न मिला जीवन मतलब से ईश कृपा न मिले मतलब से न वृक्ष फले वरना मतलब की इस दुनिया में बिन मतलब कुछ भी नहीं


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