मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

तुम्हारे प्रेम में

शंकर सिंह

ऐसा कुछ है तुझमें और मुझमें जैसे हवा गाती है तुम्हारे गीत मै लिखता हूँ तुम्हारे रूप ! पर एकाकी रहेगा ये मन प्रकृति के प्रेम में समंदर जैसा या फिर शून्य के गर्त में ब्रह्माण्ड खोजने जैसा तुम्हारे प्रेम में !


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें