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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

सामना

सत्येंद्र कुमार मिश्र 'शरत्'

अपने से कब तक भागेंगे हम, छिपाएंगे चेहरा आईने से कब तक, नजर अंदाज करेंगे अपनी कमियों को कब तक। आओ अपनी कमियों के साथ जीना और मुस्कुराना सीख लें। सामना करें अपना आईने के सामने। आसान हो जाएगी ज़िंदगी।


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