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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

अधूरी जिंदगी

रवि प्रभात

जिंदगी मेरी पूरी हो जाएगी जिस दिन “तुम” मेरी हो जाओगी पता है ऐसा नहीं हो पायेगा मै अपनी चिरनिंद्रा में अधूरा ही जाऊंगा पर भूल मत जाना यारा मुझको तुम्हारे लिए ही अगले जन्म में आऊँगा


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