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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

मिलन

रामदयाल रोहज

सरिता लाती है सफेद फूलों की वरमाला जब सागर से होता है मिलन तो सागर फूला नहीं समाता मस्ती में गाने लगता है प्यार के गीत जिसे सुनकर माँझी की पतवार चलने लगती है और तेज नावों के पाँवों में स्वत: शुरु होती है थिरकन सागर दोनों हाथों से लुटाने लगता है भिक्षुक से खङे किनारों पर अनमोल मोती मैली झोलियों में आ जाती है अतिसुन्दर चमक अब शुरु होती है सरितासागर की प्रेम कहानी बादल की ओट से चुपके चुपके झाँकने लगता है प्रभात का सूर्य


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