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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

कुछ तो सीखें

पवनेष ठकुराठी ‘पवन’

आखिर अब तो हम सचेत दिखें, निज अतीत से कुछ तो सीखें। निज भाषा को अपनायें निज संस्कृति के मोती पायें पुकार-पुकार कह रही है हमको वीर बलिदानियों की चीखें, निज अतीत से कुछ तो सीखें। निज सभ्यता का त्याग ना करें द्रोहियों से कदापि ना डरें छोड़कर कलह आपसी एकता के गीत हम लिखें, निज अतीत से कुछ तो सीखें।


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