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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

काश कि दुनिया ऐसी हो

जय प्रकाश भाटिया

इंसानों की बस्ती हो, हर आँगन खुशियाँ बसती हो, हर हृदय विशाल उपकारी हो , हर जन प्रभु का आभारी हो , यारों की महफ़िल सजती हो, काश की दुनिया ऐसी हो सोने की चिड़ियाँ उडती हों , दूध दही की नदियाँ बहती हों, हर तरफ छाई हरियाली हो , हर डाल पे कोयल काली हो , सुख चैन की बंसी बजती हो, काश की दुनिया ऐसी हो हर नेता सच का प्रेरक हो , जनता का सच्चा सेवक हो , भ्रष्ट का कोई स्थान न हो , किसी सभा में उसका मान न हो , झूठे की ऐसी तैसी हो , काश की दुनिया ऐसी हो हर आँगन महके खुशबू से, हर उपवन सदा बहार रहे, हर चेहरे पे मुस्कान सजे , हर दिल में सच्च्चा प्यार पले, स्वाभिमान से गर्दन ऊंचीं हो , काश की दुनिया ऐसी हो बच्चों को सच्चा ज्ञान मिले, हर गुरु जन को सम्मान मिले, घर मात-पिता का आदर हो, मन प्रेम प्यार का सागर हो, स्वर्ग से सुंदर धरती हो , काश की दुनिया ऐसी हो कभी भूखे पेट कोई सोये न, कोई ममता की मारी रोये ना, हर और छाई खुशहाली हो, हर रात यहाँ दीवाली हो, दीपों की माला जलती हो, काश की दुनिया ऐसी हो ईश्वर भक्ति में हर श्वास रहे, प्रभु में सबका विश्वास रहे, संस्कार भरा हर जीवन हो, प्रभु नाम यहाँ संजीवन हो, दिव्य ज्ञान की ज्योति जलती हो , काश की दुनिया ऐसी हो


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