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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

फादर्स डे पर एक रचना

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना

भले तुम्हें निज देव दिखायी दें ना दें मुझको तो भगवान दिखायी देते हैं। अपनी अपनी आंखें हैं निरुपण कर लें मुझको मेरे प्राण दिखायी देते हैं। मेरी सांसों में ही जिनकी धड़कन है मेरे आंसू में ही जिनकी उलझन है जगे रात भर मेरी नींद बुलाने को उनके सब अवदान दिखायी देते हैं। नेह स्नेह उनका कुबेर धन पर भारी बोली तुलसी की कविता से भी प्यारी जब सिर पर आशीष युक्त कर धरते वे सारे पथ आसान दिखायी देते हैं। जीवन जीने का हर श्लोक सिखाये वे झंझा से लड़ने का मंत्र बताये वे पाया उनसे संबल,उस बल जिंदा हूं मुझको वो वरदान दिखायी देते हैं। चरण ही उनका मेरे मन का चारोधाम सत्यम शिवम सुंदरम हैं वे आठोयाम पग रज उनका चंदन से भी पावन है मुझे तीर्थ स्थान दिखायी देते हैं।


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