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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

कदम

गीता घिलोरिया

कदम चाहे जिस ओर जाए, अपने दो कदमों पे यकीं रखना...! कोई और पहचाने या ना-पहचाने, अपनी साँसें इनमें सटी रखना !! वो रातें बदल गयीं थीं, ये रातें भी बदल जायेंगी! कल वहाँ कट गयीं थीं, कल कहीं ओर कट जायेंगी !! दो पल ठहर बतिया लें बस, रात भर कुछ सुस्ता लें बस, फिर ले जाए आँधी जिस ओर.. बस इन कदमों तले जमीं रखना ...! कोई ओर जाने ना-जाने इनको, अपनी साँसें इनमें डटी रखना !! ये कदम चाहे जिस ओर जाए, अपने दो कदमों पे यकीं रखना...!


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