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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

स्त्री

गरिमा

मैं स्त्री हूं, इसलिए हर सुख दुख सहती हूं, भगवान ने मुझे सहनशील बनाया है, इसलिए सब की डांट सुनती हूं, क्योंकि मैं स्त्री हूं। मुझसे सारी अपेक्षाएं रखी जाती है, जिसे पूरा करना मेरा फर्ज है, अगर कोई गलती कर दूं तो, मुझे उलहाना मिलता है, क्योंकि मैं स्त्री हूं। कोई तकलीफ घर पर आ जाए तो, हिम्मत कर दिया मैं जलाती हूं, मुझ पर कोई परेशानी आ जाए तो, किसी से नहीं बताती हूं, क्योंकि मैं स्त्री हूं। मैं तुम्हारी बातों में बहुत जल्दी आ जाती हूं, क्योंकि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, तुम इस बात का गलत फायदा उठाना चाहते हो, और मुझ पर गुस्सा करते हो, क्योंकि मैं स्त्री हूं।।


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