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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

पिता का वादा

गरिमा

एक विशाल पेड़ होते हैं पिता, जिसकी छाँव में सुकून मिलता है, हमें चलना सीखाते हैं पिता, हमसे वादा करते हैं पिता, वो कभी हमें गलत रस्ते पर चलने नहीं देंगे। वो हमेशा हमारा हाथ थाम लेंगे, हमारी हर गलती को माफ़ करेंगे। अपना हर वादा निभाते हैं पिता, पर जब कुछ गलत करते हैं पिता, अपना वादा भूल जाते हैं पिता, तो हम उन्हें सही रस्ते पर लाते हैं, उनको सही गलत का फर्क बताते हैं। जब शराब पीकर आते हैं पिता, और घर में सबको मारते हैं, सब कुछ भूल जाते हैं पिता, उनके बच्चे उनको अपना वादा याद दिलाते हैं । फिर दुखी हो जाते हैं पिता, अपने बच्चो से माफ़ी मांगते हैं । और देते हैं सारी खुशियाँ पिता, न हो पिता तो जीवन है सूना, अपने हर वादे को निभातेहैं पिता।।


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