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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

सूदखोर

राजपाल सिंह गुलिया

सूदखोर बन निमिख वसूले , करता है जब समय हिसाब . रहे अश्व सा सदा दौड़ता , पकड़ सका है इसको कौन . कहो बात को यथासमय तुम , नहीं ठीक यूँ रहना मौन . किए जुल्म थे मजलूमों पर , दिया आज ने उठा नकाब . चूक गए जो कभी व़क्त को , नहीं कभी भी करो विलाप . बढ़िया मरहम कहें काल को , घाव भरे ये अपने आप . अनुत्तरित प्रश्नों का कभी तो, देगा लम्हा सही जवाब . वक्त करेगा सही फैसला , थोड़ी सी धर ले तू धीर . गुजर गई जो वेला तन की , पुरवा भी तब देती पीर . स्वयं कभी हम ठीक नहीं तो , कह देते हैं समय खराब .


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