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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

कठिन परीक्षा की वेला है

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

कठिन परीक्षा की वेला है । मोल धैर्य का है लाखों में,पास नहीं मेरे धेला है । भावहीन सब गीत हो गये । अश्रुबिंदु अब मीत हो गये । जो खुशियों की बातें थी,वह- किस्से सभी अतीत हो गये । मेरे पास नही है कोई,यह जग अरबों का मेला हैं। कठिन परीक्षा की.............। समय! मेरा उपहास न कर तू! मुझको जीवित लाश न कर तू! घुट- घुट कर मैं मर न जाऊँ, और अधिक अब त्रास न कर तू। सुख की आश दिखा ,दुख देता,तू जादूगर अलबेला है। कठिन परीक्षा की.......... नैनों में अब नीर नही है। न ही सुख है,पीर नही है । कैदी हो गईं सारी खुशियाँ, न बंधन, प्राचीर नही है । यूँ ही उर पाषाण हुआ न, इसने वज्रपात झेला है । कठिन परीक्षा की ......................


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