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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

अतिशय प्यारा उपवन ये

बृजेश पाण्डेय 'विभात’

प्यारी-प्यारी परियों का है अतिशय प्यारा उपवन ये।
रंग-बिरंगे सुमनों का है पारिजात-सा मधुवन ये।

वर्ण कपोती काया कंचन कौमुद कलियाँ किलकारी।
कोकिल-कूजन कण-कण करती कौस्तुभ-सी कामदकारी।
निस्पृह भँवरा भ्रम में पड़ कर तकता है पावन वन ये।
प्यारी-प्यारी परियों का है---।

रक्तिम-टेसू पीत-डहेली चन्दन-सौरभ सिंचित रस।
माँ की ममता पाने आँगन बेटी बन आयी औरस।
खुलकर बरसीं मेघ-घटाएँ हरित हुआ मन-सावन ये।
प्यारी-प्यारी परियों का है—

कल्पित जग परिवर्तित सच में आशाएँ अभिलाषाएँ।
निश्छल मन की भोली परियाँ विचरें हँस-हँस मुसकाएँ।
मैना गाए गौरैया सँग सुन्दर है वृन्दावन ये।
प्यारी-प्यारी परियों का है---।


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