मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 64, जुलाई(प्रथम), 2019

आंखों का पानी मर गया

यूसुफ़ रईस

उसकी भी आंखों का पानी मर गया शख़्स जो था खानदानी मर गया। सबने कायम कर लिये अपने निज़ाम यानि हुक्मे-आसमानी मर गया। लफ़्ज़ काग़ज़ पे तो ज़िंदा हो गये अस्ल जो था वो मआनी मर गया । अब भी होती हैं मुलाक़ातें मगर रिश्ता जो था दर्मियानी मर गया । कर रहा वो उम्र से बातें बड़ी उसका बचपन जो था यानी मर गया। दर-ब-दर किरदार ज़िंदा छोड़ कर जो सुनाता था कहानी मर गया।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें