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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



डीएम साहब का फैसला ऑन द स्पॉट...!!


तारकेश कुमार ओझा


हवालात में घुस कर चंद थप्पड़ और कुछ घूंसे। डीएम साहब ने उस युवक पर बस इतना रोष ही जताया था। लेकिन बवाल मच गया। क्योंकि अपनी धर्मपत्नी की मौजूदगी में जब वे गुनाहगार के साथ फैसला अॉन द स्पॉट कर रहे थे, तभी किसी अंगुली करने वाले ने इसका वीडियो बना कर वॉयरल कर दिया। अब देखिए मजा कि डीएम साहब को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है, जबकि गुनाहगार मीडिया को बयान दे रहा है। अपने ऊपर हुए कथित अत्याचार की कहानी सुना रहा है। दलीलें दे रहा है कि उसे तो पता ही नहीं था कि जिस महिला पर वह रोष जता रहा है , वह डीएम साहब की पत्नी है। किसी टैग संबंधी गलती के चलते साहिबा उनके ग्रूप में एड हो गई थी। आरोपी के माता - पिता कह रहे हैं कि भविष्य में यदि उनके बेटे के साथ कुछ भी गलत हुआ तो इसका जिम्मेदार डीएम साहब को माना जाएगा। दरअसल मेरे गृहराज्य पश्चिम बंगाल के एक जिले के डीएम साहब वाकई काफी गुस्से में थे। क्योंकि फेसबुक पर किसी सिरफिरे ने उनकी पत्नी के बाबत अश्लील टिप्पणी कर दी थी। हद है कि राजनेता सवाल करने वाले को माओवादी करार देते हुए गिरफ्तार कर जेल भिजवा सकते है, लेकिन डीएम साहब अपनी पत्नी के साथ बदसलूकी करने वाले पर लात - घूसे भी नहीं बरसा सकता। यह सरासर अन्याय है। उस रोज भी यही हुआ। साहब को जैसे ही पता चला कि फेसबुक पर किसी ऐरे - गैरे ने उनकी अर्द्धांगिनी के खिलाफ अश्लील टिप्पणी की है , पुलिस को इत्तला हुई। आनन - फानन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। चलन के मुताबिक जैसा होता है, आरोपी को थाने के लॉकअप में रखा गया। बस फिर क्या था , बिल्कुल सिंघम स्टाइल में साहब की कार चिंचियाती हुई थाने के सामने रुकी। अजय देवगन या अक्षय कुमार स्टाइल में बूट चटकाते हुए साहब बीवी के साथ लॉकअप में घुसे और आरोपी पर थप्पड़ और घूंसों की बरसात कर दी। वॉयरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि गुस्से से लाल - पीले साहब के अगल - बगल कुछ पुलिस वाले बिल्कुल मूकदर्शक की भांति खड़े हैं। जबकि आरोपी जान की दुहाई मांग रहा है। बार - बार सॉरी सर... सॉरी सर बोल रहा है, जबकि साहब उस पर घूंसे और थप्पड़ बरसाते हुए उसे जान से मारने तक की धमकी दे रहे हैं। हवालात में मौजूद साहब की पत्नी ने भी आरोपी को एक लात जमाए। अब साहब की हर तरफ आलोचना हो रही है। राज्य सरकार ने भी उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया है। जबकि उनकी पत्नी ने फेसबुक पर ही अपने साहब पति की तारीफों के पुल बांधते हुए उन्हें अपना हीरो करार दे दिया है। सचमुच जमाने का दस्तूर भी अजब है। फिल्मी पर्दे पर जब कोई सिंघम फैसला अॉन द स्पॉट करता है तो हम तालियां पीटते हैं। फिल्म को चंद दिनों में ही पांच सौ करोड़ क्लब में शामिल करा देते हैं। लेकिन वास्तविक जिंदगी में जब कोई ऐसा करने का साहस करे तो कहीं कोई ताली नहीं कोई माला नहीं। यह तो सचमुच दोहरापन है। अब देश में अलग - अलग राज्य है और राज्यों में अलग - अलग जिले। एक - एक जिले में एक - एक डीएम होते हैं। डीएम यानि जिले का मालिक या कहें तो राजा। देश में होता रहे निर्भया जैसे कांड। बेटियां को स्कूल जाना दुश्वार हो। लेकिन किसी राजा की रानी की तरफ कोई आंख उठा कर देखे तो राजा इसे कैसे बर्दाश्त कर सकता है। यह तो लोकतंत्र है वर्ना ...। साहब ने आरोपी का सिर कलम नहीं कर दिया या आंखें नहीं निकलवा ली ... यही क्या कम है।


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