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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

मेरे दर्द का एहसास नहीं

डॉ० अनिल चड्डा

जिसे मेरे दर्द का एहसास नहीं, वो तो मेरे दिल के पास नहीं। दिल मेरा दिन-रात जलता रहा, तेरे लिए तो बात ये खास नहीं। ढूंढ लिया जितना ढूंढना था तुझे, अब मिलने की कोई आस नहीं। कोई भी मौसम, कोई भी ऋत, अब आती दिल को रास नहीं। जिंदगी बीत गई तेरे इंतजार में, रही अब मुझको कोई आस नहीं।

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