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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



बेवफ़ाई तेरी फितरत ही सही


डॉ० अनिल चड्डा


 
बेवफ़ाई तेरी फितरत ही सही
हमें तो प्यार करना आता है
चोट देना तेरी हसरत ही सही
हमें मरहम लगाना आता है


काबिज़ हो गए हो दिलो-दिमाग पर, लेकिन
दुनियावी मसृफ्तियों का क्या करूँ
तुम हमारी जरूरत ही सही
हमें तो दिल बहलाना आता है


किसी की बेवफाई का साया
अभी तक तुम्हारे आसपास है
दिल में तेरे गफलत ही सही
हमें शक मिटाना आता है


चुपके से आ गए हम 
तेरे दिल के दायरों में कभी
हम पर यह तोहमत ही सही
हमें कबूल करना आता है


दुश्मनी ही कीजिये हजूर
दोस्ती को रहने दीजिए
तुमको हमसे नफरत ही सही
हमको सब निभाना आता है              		 
 

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