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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

जयंती पर विशेष-
कथाकार कमलेश्वर का साहित्य

पवनेश ठकुराठी 'पवन

कथाकार, पटकथा लेखक और पत्रकार कमलेश्वर का जन्म 06 जनवरी 1932 को मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। कमलेश्वर बीसवीं शती के सबसे सशक्त लेखकों में से एक थे। उपन्यास, कहानी, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फिल्म, पटकथा, धारावाहिक जैसी अनेक विधाओं में उन्होंने अपनी लेखन प्रतिभा का परिचय दिया। कमलेश्वर ने एक सड़क सत्तावन गलियाँ, तीसरा आदमी, डाक बंगला, समुद्र में खोया हुआ आदमी, काली आँधी, आगामी अतीत, सुबह...दोपहर...शाम, रेगिस्तान, लौटे हुए मुसाफिर, वही बात, एक और चंद्रकांता, कितने पाकिस्तान आदि उपन्यास लिखे। कितने पाकिस्तान(2000) उनका सबसे चर्चित उपन्यास है। कमलेश्वर ने तीन सौ से अधिक कहानियाँ भी लिखीं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियाँ हैं- तलाश, राजा निरबंसिया, सांस का दरिया, नीली झील, बयान, नागमणि, अपना एकांत, आसक्ति, जिंदा मुर्दे, जॉर्ज पंचम की नाक, मुर्दों की दुनिया, कस्बे का आदमी आदि। उन्होंने अधूरी आवाज, रेत पर लिखे नाम, हिंदोस्ता हमारा तीन नाटक भी लिखे।

कमलेश्वर ने अपने जीवनकाल में सात विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। ये पत्र- पत्रिकाएं हैं, विहान, नई कहानियाँ, कथायात्रा, गंगा, इंगित, श्रीवर्षा और धर्मयुग। इसके अलावा आप दैनिक जागरण में 1990 से 1992 तक तथा दैनिक भास्कर में 1997 से लगातार स्तंभ लेखन का काम करते रहे। उनकी विलक्षण साहित्य क्षमता के संबंध में प्रसिद्ध कथाकार राजेंद्र यादव ने कहा है- वे मूलतः कहानीकार थे। बातचीत और लेखन में किस्सागोई उसका सबसे विलक्षण हथियार था। अपने साफ उच्चारण और धारधार भाषा के कारण वह जहाँ भी रहा एक अजीब तरह की जीवंतता बनाए रखी।

राजा निरबंशिया कहानी लिखने वाले कमलेश्वर केवल साहित्य और पत्रकारिता के ही राजा निरबंशिया नहीं थे, बल्कि वे रजट पट के भी राजा निरबंशिया थे। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों की कहानी, पटकथा और संवाद लिखे। उन्होंने फिर भी, आंधी, मौसम, सारा आकाश, रजनीगंधा, छोटी सी बात, मिस्टर नटवरलाल, सौतन, लैला, राम बलराम, अमानुष, सौतन की बेटी, यह देश, रंग बिरंगी, साजन की सहेली, पति पत्नी और वह आदि फिल्मों की कहानी, पटकथा अथवा संवाद लिखे। उनके द्वारा लिखी कई फिल्मों ने अपार लोकप्रियता अर्जित की। वास्तव में अपने समाज की जो यथार्थता उनके कथा साहित्य में देखने को मिलती है, वही यथार्थता उनकी लिखी फिल्मों में भी दिखाई देती हैं। आंधी, सारा आकाश, यह देश, पति,पत्नी और वह जैसी फिल्में इसी की उदाहरण हैं। लोकप्रिय टीवी धारावाहिक चन्द्रकांता के अलावा दर्पण और एक कहानी धारावाहिकों की पटकथा भी कमलेश्वर ने ही लिखी। उन्होंने कई वृतचित्रों और कार्यक्रमों का निर्देशन भी किया।

वर्ष 1995 में कमलेश्वर को 'पद्मभूषण' से नवाज़ा गया और वर्ष 2003 में उन्हें कितने पाकिस्तान (उपन्यास) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कमलेश्वर ने अपने 75 साल के जीवनकाल में दर्जनों उपन्यासों, कहानी संग्रहों और करीब 100 फिल्मों की पटकथाएँ लिखीं। इस प्रकार हजारों कागज के पन्नों और आठ दर्जन से भी अधिक रजत पटों पर अपनी कलम से शब्द चित्र अंकित कर यह साहित्य, पत्रकारिता और रजत पट का राजा निरबंशिया 27 जनवरी, 2007 को इस संसार को छोड़कर सदा के लिए चला गया।


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