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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



कटु वचनों को मन से मिटा दो


मुकेश कुमार ऋषि वर्मा


आज के समय में अपशब्दों यानी गालियों का चलन बड़ी तेजी से फेल रहा है | लोग अपशब्दों को मजाक - मजाक में भी आपसी व्यवहार में प्रयोग करने लगे हैं | लेकिन कभी - कभी मजाक भी इतना भारी पड़ जाता है कि जान पर बन आती है | अक्सर आये दिन न्यूज आती रहती हैं आपसी लड़ाई - झगड़ों की जो मामूली कटु वचन से शुरू होकर हत्या तक हो जाती है | रेल, बसों में मामूली सी बात को लेकर मारकाट मच जाती है | एक गाली बड़े - बड़े अशुभ कर्म का कारण बनती है | गालियों का दुष्परिणाम बहुत भयानक निकलता है |

विडम्बना देखिये दस साल पहले अगर आपको किसी ने कोई अपशब्द कहे या गालियाँ दी अथवा कोई चुभने वाले विषेले बोल बोले | आपको नीचा दिखाया, अपमानित, बदनाम किया हो, तो जैसे ही वो किसी स्थान आदि पर अचानक से आपको मिल जाये, निश्चित आपको वो दस साल पहले का बीता हुआ पल ऐसे याद आयेगा जैसे आँखों के सामने जीवंत फिल्म चल रही हो | मन के द्वारा यह याद रखने की प्रवृत्ति लगभग संसार के सभी प्राणियों में है, खासकर मनुष्यों में सबसे ज्यादा है | और यही कारण है कि आये दिन दिल दहला देने वाले समाचार आते रहते हैं |

आज मनुष्यों ने अपनी प्रगति की गति को अत्यधिक तीवृ कर लिया है | यह तीवृगति मनुष्यता के पतन का कारण बन रही है | सोशल मीडिया ने मनुष्य के सुख चैन को छिन्न-भिन्न कर दिया है | सोशल मीडिया कुछ हद तक फायदा भी पहुंचाता है तो इसके नुकसान भी बहुत हैं | सबसे अधिक कटु शब्दों, गालियों, अपशब्दों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर ही होता है | वहीं से लोग इसके आदी हो जाते हैं और आपसी व्यवहार में भी उन्हीं शब्दों का प्रयोग करने लगते हैं | यहीं से शुरूआत होती है इंसानी सिध्दांतों के पतन
की |

अगर हमें सुख शांति से संसार में जीवन जीना है तो मन की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है | मन अगर निर्मल होगा तो कटुवचनों की उत्पत्ति नहीं होगी | सुख का अनुभव होगा और आपसी सम्बन्धों में मधुरता आयेगी | चलिए भुला दीजिए अगर किसी ने आपको गाली दी, अपशब्द कहे, नीचा दिखाया | आप अपनी तरफ से उसे माफ कर दीजिए और छोटे बन जाइये | समय एक दिन उससे उसकी हर काली करतूत का हिसाब लेगा | बस आप कोई हिसाब किताब मत रखिये | मन को पवित्र बनाइये और जीवन बगिया को मंहकाइये |


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