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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



दौलत


सुरेश सौरभ


बहुत देर से दूल्हा मुंह लटकाए उदास बैठा था। दुल्हन विदाई की बेला आ रही थी, कितना खर्च हुआ इसी गणित में व्यथित था, बस का किराया, जेवर,बैन्ड- बाजा आतिशबाजी ये वो अभी ऐट होम बाकी पड़ा है, क्या होगा । मिला कुछ नहीं ? तभी वहॉ ताली पीटते हुए हिजड़े आ गये," लाओ भाई २१ हजार । इनकी जोड़ी भगवान सलामत रखे। फिर नेग- न्योछावर के लेन-देन की तकरार शुरू हुई जिसमें दूल्हे की मॉ बोली हमें क्या मिला है जो तुम को दे दें। ये देखो टीन-टब्बर यही मिला है।

तब एक हिजड़ा हाथ चमकाते हुए बोला- आए हाय! करोड़ों की इज्जत लिए जा रही हो कह रही हो क्या मिला।'

अब दूल्हे ने गर्दन उठाई और मंद-मंद मुसकुराने लगा। फिर उसके चेहरे पर शिकन की उभरी गझिन सिलवटें जाती रहीं।


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