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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



सपने की हकीकत


राजीव कुमार


हेड क्लर्क निहायत ही शरीफ आदमी थे।

विनोद आनंद झा को कभी हिसाब-किताब में घोटाला करने का ख्याल नहीं आया। आए दिन टेलीविजन में और अखबारों में घोटाला और घोटालेबाजों को मिली सजा के बारे में सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो जाते थे। अभाव में ही समय व्यतीत कर रहे थे।

इंसान की फितरत में है ख्याली पुलाव पकाना और ऐसा करने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है। ख्याली पुलाव पकाने के क्रम में उन्होंने एक बंगला खरीद लियाय, दर्जन भर नौकर-चाकर रख लिए। उनकी तरक्की भी हो गई। अब तो कार्यालय मर्सिडीज में ही जाने लगे, वो भी ड्राइवर के साथ। बेटी की शादी अमीर घराने में कर दी, बेटे को पढ़ने के लिए विलायत भेज दिया, पत्नी को हाॅलमार्क सर्टिफाइड गहना खरीद दिया।

विनोदानंद की नींद खुली तो पप्पू के साथ बिजिलेंस वाले खड़े थे। ऑफिसर ने कहा, ‘‘आपने हिसाब-किताब में बहुत बड़ा घोटाला करके करोड़ों कमाए हैं। और गरीबी का ढोंग करते हैं, आपको हमारे साथ चलना होगा।’’ पुलिस ने विनोदानंद बाबू को हथकड़ी पहनाई और ले जाने लगे।

उन्होंने मन ही मन कहा, ‘‘भगवान आपकी कैसी लीला है? मैं सपने में अमीर बना तो आपने हकीकत में जेल करवा दिया। प्रभु ऐसा चमत्कार कीजिए कि दूसरे के एकाउंट का रुपया मेरे में ट्रांसफर होता रहे।


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