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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

भलाई का बदला

राजीव कुमार

भलाई का बदला भला ही मिला है। जेल की सजा काटने के बाद प्रलय ने अपने शत्रुओं से बदला लेने की ठानी। अपनी मंशा को गुप्त रखते हुए उसने शत्रु से मित्रता की, दुश्मनी को भुला देने की कसमें खाईं। भले इंसान की भलाई देखकर, बुरे इंसान की शंका और प्रतिशोध की प्रचण्ड ज्चाला और भी गहरी हुई। प्रलय के चलाए हल्के-फुल्के बाण धराशायी हो गए।

अब दुश्मनी को भुलाकर प्रलय ने अपने जैसा बनाना चाहा और इसी मंशा को नजर में रखते हुए उसने कहा ’’ मित्र, मैं एक काम बताता हूँ, उसमें बहुत सारा रूपया मिलेगा। ’’ ’’ जितना मैं कमाता हूँ, उसी में खुश हूँ।

प्रलय को लगा कि मैं उसको अपने जैसा बना लूँगा। और भले इंसान को लगा कि बुरे को अपने जैसा बना लूँगा मगर अफसोस कि दोनों नाकाम रहे।

प्रलय अलग रहकर आज भी प्रतिशोध की प्रचण्ड ज्वाला में जल रहा है और उसका मित्र भला इंसान अब सतर्क हो गया है।


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