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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

दस मंजिला इमारत

राजीव कुमार

अग्रसेन अपार्टमेंट में दसवें तल का कमरा बहुत दिनों से खाली पड़ी है, लोग कहते हैं कि वहाँ भूतों का वास है। बहुत मुश्किल से मिला किराएदार भी दो दिन से ज्यादा नहीं टिका। मिसेज शर्मा और मिसेज वर्मा को तो कई बार अन्दर से आती चीख सुनाई पड़ी। नाम से गबरू और शरीर से दुबला-पतला लड़का गोविन्द जब उस कमरे में रहने आया तो, सीढ़ी पर ही खड़ी मिसेज शर्मा ने आगाह करते हुए कहा ’’ छोकरे, कमरा तुम्को मुफ्त में क्यों दिया गया है, मालुम है? उस घर में चुड़ैल रहती है।’’

मिसेज वर्मा ने हामी भरते हुए कहा "और नहीं तो क्या हम लोग झूठ बोल रहे हैं? तुम खुद ही देख लेना।"

दिनभर की थकान के बाद गोविन्द को नींद आ जाती, घोड़ा बेचकर सोने वाली। पंद्रह दिन गुजर जाने के बाद मिसेज शर्मा और मिसेज वर्मा दोनों को ही आश्चर्य हुआ, मकान मालिक की भी लालच बढ़ी। भाड़ा वसूलने के मनसूबे तलाशने लगा। इधर गोविन्द का काम नहीं चलने कारण गोविन्द का पेट भरना मुश्किल हो गया, कुछ दिन समोसा खाकर रात गुजारने के बाद वो और भी दुर्बल हो गया़। एक रात भरपूर थकान और पुरजोर भुख के कारण, बिना लिफ्ट वाली बिल्डंग में सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ होने के कारण मिसेज शर्मा और मिसेज वर्मा ने गोविन्द को नीचे सोया देखकर, एक दूसरे की तरफ देखा और दोनों ने बारी-बारी से मकान मालिक को सूचना दी। वो कमरा आज भी खाली पड़ा है।


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