मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

कुंडलियां

शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'

दे सकते तो दीजिए, जीने का अधिकार। तुम देते हो गर्भ में, क्यों बच्ची को मार।। क्यों बच्ची को मार, पाप करते हो भारी। करो इसे स्वीकार, प्रकृति की यह कृति न्यारी। कहता शिव दिव्यांग, पुण्य थोडा तू कर ले। बेटी है इंसान, उसे भी जी लेने दे।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें