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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

खुश रह

वीरेन्द्र कौशल

मेहनत कर और रोजी कमा खुश रह हर त्योहार मना हर त्योहार अपार खुशीयाँ देता गरीब का पेटा भर देता यही है सब की पुंजी हर सफलता की खालिस कुंजी कर भला और फिर भूलजा चाहे कोई ख़ुशी फिर गुनगुना मेहनत कर ....... खुश रह हर ...... आचरण खातिर बनवास भी प्यारा सीताहरण कारण विद्वान भी मारा सदा भाईयों संग बांटा प्यार त्याग खातिर सदा रहे तैयार संस्कारों को सदा सार्वोपरि माना फिर चाहे होली -दीपवली साथ मना मेहनत कर ....... खुश रह हर ....... सदा अपनो ही सहारे जीत न कोई दुशमन सारे मीत झूठ फरेब अपवाद से बच ईमानदारी विश्वास ही केवल सच सभी संग अपना व्यवहार जता फिर चाहे मोहर्ररम ईद मना मेहनत कर ..... खुश रह हर ..... सवा लाख से एक लड़ाया अपने शेहजादों को भी चिनवाया सदा खुशहाली खातिर विनती कीती नहीं बखारी अपनी आप बीती गैरों खातिर दिया लंगर लगा फिर चाहे शहीदीदिवस गुरूपर्व मना मेहनत कर ..... खुश रह हर ..... सच्चाई खातिर सूली पर चढ़ नहीं कबूला कभी दूसरा गढ़ प्रेम संदेशा ही दिया हर लम्हां कभी संता बन दिये उपहार मन में धारा सदा उपकार फिर चाहे गुड-फराईड़े क्रिसमस मना मेहनत कर ..... खुश रह हर ..... कभी न कर नीयत खोटी हर मेहनत पर मिले रोटी नीयत साफ तो डर नहीं कोई भी एक आडम्बर नहीं सदा सभी का चाह भला फिर चाहे कोई उत्सव मना मेहनत कर ..... खुश रह हर .....


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