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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

प्यार तुझसे ही है

रौली मिश्रा

कौन गलत था कौन सही था उस वक्त किसी ने यह सोचा नहीं धोखे की दोनों बात कर रहे थे पर धोखा किसी ने किसी को दिया नहीं एक गलतफहमी से सब कुछ उस पर बिखर गया मानो जैसे वह पल बड़ा गहरा घाव दे गया।। रुखसत वह उस इस दुनिया को करना चाहता था पर उसके प्यार ने ऐसा करने ना दिया कुछ और चल रहा होगा उसके दिमाग में ऐसा उसका मन कह रहा फिर एक बार पूछो उससे क्या तुमने मुझसे नहीं प्यार किया डरता नहीं था उसका दिल यह सुनने से फिर भी वो है उसके पास गया पूछा उसने फिर से तसल्ली से कि तुम बता दो मुझको वो कोई और गैर था वह कोई और गैर था ।‌। उसने भी फिर हाथ पकड़ कर बोला उससे हां वह कोई गैर था वो कोई गैर था।।


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