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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

नये वर्ष की मधुर बधाई

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना

टूटी छप्पर छानी वाले गांव को छाले पर छाले ढोते उस पांव को नये वर्ष की मधुर बधाई नमक रोटियों वाली आधी थाली को बिखरे सपनों वाली आंख सवाली को नये वर्ष की मधुर बधाई आसमान में हंसते चंदा तारों को कांप रहे कथरी में दीन दुलारों को नये वर्ष की मधुर बधाई अंहकार से भरे हुए उपहारों को अनय बिछाने वाले कुटिल विचारों को नये वर्ष की मधुर बधाई अपने अल्पज्ञान व अपनी लघुता को जो स्वयं में ज्ञानी हैं उनकी प्रभुता को नये वर्ष की मधुर बधाई संविधान को गाली देते नारों को पाखंडों के पोषक उन मक्कारों को नये वर्ष की मधुर बधाई।


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