Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



अभी भी


दिनेश कुमार


                	   
जो कहते हैं कि 
दुनिया बहुत ख़राब हो ग़ई है 
अब यहाँ जीना बहुत मुश्किल है 
मानाकि दुनिया ख़राब है 
तब दुनिया की बात करते हुए 
तुम यह क्यों भूल जाते हो 
कि तुम भी इसी दुनिया में हो
तब तो तुम भी ख़राब हुए 
नहीं-नहीं मैं अपनी नहीं कह रहा हूँ 
दुनिया के बारे में बोल रहा हूँ 
तुम, चाहे जितना भी ख़राब कह लो 
फ़िर भी दुनिया बहुत सुन्दर है 
अभी भी 
मिट्टी की उर्वर क्षमता बहुत है 
नदियों के पानी का प्रवाह 
इतने जल्दी रुकने वाला नहीं है 
पर्वत अभी ढहने वाले नहीं है 
समुद्र अभी सूखने वाला नहीं है 
धरती अभी हिलने वाली नहीं है 
वृक्ष अभी उजड़ने वाले नहीं है
पक्षियों की कलरव ध्वनि 
गूँजती रहेगी 
तब तक कि जब तक 
यह धरती घूमती रहेगी 
धरती का घूमना 
हमारी जीवन्तता का प्रतीक है 
हर व्यक्ति का अपना
एक नज़रिया होता है 
उनकी नज़र में
दुनिया ख़राब हो सकती है 
लेकिन मेरी नज़र में दुनिया 
अभी भी बहुत सुन्दर है
जिसमें अभी बहुत कुछ रच सकते हैं 
       

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें