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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

पानी

चंद्र मोहन किस्कू

मीलों दूर से औरतों की सर पर चढ़कर घर को पहुंची एक बून्द पानी प्रणाम औरतों की वह यात्रा प्रणाम औरतों की वह थकावट और अंत में प्रणाम एक बून्द पानी को जो अमृत बनकर आया है मुझ तक .


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