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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

नववर्ष की आशा

अनिल कुमार

खत्म हो गई 19 की रोनक अच्छे-बूरे जीवन की सहूलियत अब नये रूप में जीवन पनपेगा विगत त्रासदियों को भूलेगा नव स्वप्नों का अँकूरण होगा नव रस से जीवन पूरण होगा विगत गलतियों से कुछ सीखेंगे नववर्ष में जीवन को खुशियों से सींचेंगे जो गुजर गया उसकी बात न होगी दुख, पीड़ा और विषाद से रीतेंगे नूतन उल्लास से जीवन भर देंगे कल न हुआ, जो अब कर देंगे हारों पर अब शोक न होगा विजय की ऐसी गाथा हम गढ़ लेंगे कुछ अनुभव पास रखेंगे कुछ अपनेपन का एहसास रखेंगे नूतन आशा की ऐसी लौ लेंगे नववर्ष को आनन्द से भर देंगे।


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