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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

हाइकु

अशोक बाबू माहौर

1. चेहरा लाल गुस्सा झलक रहा झुलसे मन। 2. आँखें उदास खामोशी चढ़ गई चुपके आज। 3. आपका घर घर साफ सुथरा तारीफें होती। 4. पक्की सड़कें धूल दबी हुई सी लगे आराम।

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