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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



उल्फ़त ने मारा


योगेन्द्र कुमार निषाद "योगी"


                	   
नज़र के सामने...... उल्फ़त ने मारा। 
जिधर जाऊँ...मुझे खिलवत ने मारा। 1

बिना समझे किया था... प्यार सबसे, 
वही उल्फ़त,....वही वहशत ने मारा। 2

तकाजा वक्त का,...मुझ पर सही था,
मगर मुझको.. मिरी किस्मत ने मारा। 3

ये दुनिया खूब..........फरेबी है यारो,
मुसीबत मे फँसा,....इज्जत ने मारा। 4

इरादा नेक था..."योगी" का फिर भी, 
शराफ़त और.....बस चाहत ने मारा। 5

मुश्किल शब्दों के अर्थ               
उल्फ़त  = प्यार
खिलवत = अकेलापन
वहशत = पागलपन
    
       

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