Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



विश्वास मर न जाये


डॉ डी एम मिश्र


                    
असफल हों या सफल हों , पर आस मर न जाये
बेशक हों  तृप्त  लेकिन यह प्यास  मर न जाये

लाखों  हैं फूल खिलते, लाखों हैं    रोज़ झरते
यह  चक्र है  नियति   का   मधुमास  मर न जाये

फ़ितरत है   आदमी  की  छूना   बुलंदियों    को
इतना  ख़याल   रखना      एहसास  मर न जाये 

दुनिया का यह चलन है , दुनिया  चलेगी यूँ   ही
धोखे   हज़ार  हों  पर  , विश्वास    मर न जाये

क्या  टूटने  के  डर  से  बनते  नहीं  खिलौने
हम  तों    मरें   हमारा   इतिहास  मर न जाये 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें