Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



सच हार गया


अनिरुद्ध सिन्हा


                    
आँखों के दिये  रौशन हैं  तेरी अदाओं से 
रहने दो  चिराग़ों को कुछ  दूर हवाओं से 

बाज़ारे-मुहब्बत  में हर  सिम्त उजाला है 
कुछ तेरी ज़फाओं से कुछ मेरी वफ़ाओं से

रहने दो अभी उसको ज़ख़्मों के हवाले  ही 
बीमारे-मुहब्बत को  क्या  काम दवाओं से 

सच हार गया फिर -से क्या खूब अदालत है 
हैरान बहुत  हूँ मैं  मुंसिफ़  की सज़ाओं  से 

खामोश  हुई  खुशबू  हर  फूल  परेशां  है
मौसम की  बग़ावत  से बेवक़्त  घटाओं से           		 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें