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वर्ष: 3, अंक 53, जनवरी(द्वितीय) , 2019



मौत भी ज़िन्दगी से डर जाए


अनिरुद्ध सिन्हा


                    
काम इतना तो दिल ये कर जाए 
बन के खुशबू कहीं  बिखर  जाए

खुद को इतना उछाल कर रखिए 
मौत भी  ज़िन्दगी से  डर  जाए  

मुस्कुराकर ही तुम  गले मिलना 
आँख जब आँसुओं से भर  जाए 

ये वतन हमको  इतना प्यारा है
हम  न  छोड़ेंगे चाहे  सर जाए

गुफ़्तगू  हम  वहाँ  से करते  हैं
वक़्त  आकर  जहाँ  ठहर  जाए         		 
 

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