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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 77, जनवरी(द्वितीय), 2020

दोहे रमेश के नववर्ष पर

रमेश शर्मा

चला वर्ष उन्नीस भी , छोड सभी का साथ । हमें थमा कर हाथ में,. नये साल का हाथ ।। पन्नो मे इतिहास के, लिखा स्वयं का नाम । चला वर्ष उन्नीस भी , यादें छोड़ तमाम ।। आने को मुस्तैद है ,.... ... नया नवेला वर्ष । दिल में सबके प्यार का, दिखे उमड़ता हर्ष ।। चला वर्ष उन्नीस भी , खेल कई नव खेल । हुए बरी कुछ लोग तो, गए भ्रष्ट कुछ जेल ।। मेरी है प्रभु आपसे, यही एक अरदास । नए वर्ष मे देश में, घर घर हो उल्लास ।। जाते-जाते साल यह, करा गया अहसास । नेताओं पर कीजिये, . नहीं मित्र विश्वास ।। हो जाए अब तो विदा,... कलुषित भ्रष्टाचार । आई है इक बार फिर, बहुमत की सरकार ।। ज्यों पतझड़ के बाद ही,आता सदा बसंत । खुशियां नूतन वर्ष में, सबको मिलें अनन्त ।। पूरा हमें यकीन है , शासन से इस बार । नया पिटारा हर्ष का, देगी कुछ सरकार ।। बदली है तारीख बस, बदले नहीं विचार । नए साल का कर रहे ,नाहक ही सत्कार ।। जाते जाते हो गया , पिछला साल उदास । बन जाऊंगा शीघ्र ही, बोला मैं इतिहास ।। मदिरा में डूबे रहे, …लोग समूची रात । नये साल की दोस्तों, यह कैसी सुरुआत ।। नये साल का कीजिये, जोरों से आगाज । दीवारों पर टांगिये, .नया कलैंडर आज ।। ढेरों मिली बधाइयाँ,........बेहिसाब संदेश । मिली धड़ी की सूइंयाँ,ज्यों ही रात "रमेश" ।। नये साल की आ गई, नयी नवेली भोर । मानव पथ पे नाचता,जैसे मन मे मोर ।। आयेगा नववर्ष में, . ..शायद कुछ बदलाव । यही सोच कर आज फिर, कर लेता हूँ चाव ।। घर में खुशियों का सदा,. भरा रहे भंडार । यही दुआ नव वर्ष मे,समझो नव उपहार ।। ऱिश्ता वो जो टूटकर,हुआ अलग इस साल । हो जाए नववर्ष मे, .....शायद पुन: बहाल ।। देना है नव वर्ष मे,........उनको भी अंजाम । नही मुकम्मल हो सके,,विगत वर्ष जो काम ।। घर में खुशियों का सदा,. रहे भरा भंडार । यही दुआ नव वर्ष मे,समझो नव उपहार ।।

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