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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

नया साल रहे खुशहाल.......

वीरेन्द्र कौशल

क्या नया पुराना साल कभी ख़ुशी कभी बेहाल बहुत अच्छे रहे साथी निकल तो गया हाथी बस रह गई उसकी पूँछ पुरानी यादें न पूछ शाम तक वह भी ज़ो अब तक सही फिर एक नया सवेरा क्या तेरा य़ा मेरा सभी तो बिल्कुल अपने नित नये नवेले सपने गैर भी रहे सुखी कोई न बसे दुखी सभी रहें सदा प्रसन्नचित न फिर कोई प्रायश्चित न बने कोई लुटेरा हर वर्ग बने कमेरा फिर एक नया सवेरा क्या तेरा य़ा मेरा पुरानी यादें न पूछ हाथी और उसकी पूँछ न कोई अनसुलझे सवाल नया साल रहे खुशहाल नया साल रहे खुशहाल.....


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