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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

नवागत का स्वागत कर लो

गुडविन मसीह

लो आ गया है, फिर नव वर्ष, नवागत का स्वागत कर लो हर्षित हुआ है, धरती गगन नवागत का स्वागत कर लो। लो आ गया..... नेह निमंत्रण लेकर आया प्रेम रस अन्तस में भर लो नव चेतन की इस आहट से स्वीकार हृदय से कर लो। भाव-विभोर हुआ है, मन नवागत का स्वागत कर लो। लो आ गया.... मौसम ने ले ली अंगड़ाई सबके मन में प्रीत जगाई सद्भाव और समरसता की कैसी अद्भुत रीति निभाई पुलकित हुए हैं वन-उपवन नवागत का स्वागत कर लो लो आ गया.... अरूणिमा की अतुराई से गूंज उठा चिड़ियों का गुन्जन पुष्प सुगंध अनुरागी भ्रमर ने छेड़ी है गीतों की सरगम झूम रहा मन हो के मगन नवागत स्वागत कर लो। लो आ गया है..... नव प्रभात की नव बेला में, संकल्प नया कोई ले लो, अपसंस्कृति का करके विसर्जन शृंगार नव सृर्जन का कर लो ईष्ट देव का करके बन्दन नवागत का स्वागत कर लो। लो आ गया है.....

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