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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

गिरगिट भैया

कृष्णलता यादव

गिरगिट भैया हमें बताना इतने रंग बदलते क्यों? क्या तुमको आलस न आता बारम्बार सँवरते हो? अभी-अभी मटमैले थे तुम अब हो बिलकुल नीले। अगले पल पीले हो जाओ बतला दो भेद हठीले।। तब ही गिरगिट हँसकर बोला - सुन ले मेरी बहना। कुदरत ने पहनाया मुझको ऐसा अद्भुत गहना।।


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